शिमला/रामपुर बुशहर। न्यूज व्यूज पोस्ट ,
हिमाचल प्रदेश की राजनीति और रामपुर बुशहर क्षेत्र के लिए मंगलवार की सुबह बेहद दुखद खबर लेकर आई। रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं हिमाचल प्रदेश के सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल का शिमला में निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। उन का आज सुबह पांच बजे शिमला चमियाना हॉस्पिटल में निधन हुआ । उनके निधन की खबर से रामपुर बुशहर सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।
नंद लाल केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि अनुशासन, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए पहचाने जाने वाले व्यक्तित्व थे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनका जीवन सुरक्षा सेवा से लेकर जनसेवा और संसदीय राजनीति तक के लंबे सफर का उदाहरण रहा।
सोनिया गांधी की सुरक्षा में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
नंद लाल का सुरक्षा सेवा से जुड़ा सफर काफी गौरवपूर्ण रहा। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कमांडो के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 1985 में वह स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) में शामिल हुए और 1997 तक इस विशेष सुरक्षा दल का हिस्सा रहे।
इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी की सुरक्षा में कमांडो के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई। उन्हें गांधी परिवार की सुरक्षा में तैनात रहने के कारण मीडिया में ‘सोनिया का संतरी’ के नाम से भी पहचान मिली थी।
उनकी सेवाएं केवल वीआईपी सुरक्षा तक सीमित नहीं रहीं। वर्ष 1982 के एशियाई खेलों (एशियाड), 1983 की गुटनिरपेक्ष बैठक और 1984 के राष्ट्रमंडल सम्मेलन की सुरक्षा व्यवस्था में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में ITBP बटालियन की कमान भी दो बार संभाली।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और चंद्रशेखर से प्रशंसा पत्र मिले। उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया था।
2007 में शुरू किया राजनीतिक सफर, लगातार चार बार बने विधायक
नंद लाल ने वर्ष 2007 में सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर कांग्रेस के टिकट पर रामपुर विधानसभा क्षेत्र से पहला चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उनकी चुनावी यात्रा इस प्रकार रही:
2007: पहली बार रामपुर से विधायक निर्वाचित हुए।
2012: दूसरी बार विधानसभा पहुंचे।
2017: लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की।
2022: चौथी बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
इस तरह उन्होंने रामपुर विधानसभा क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2022 में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी कौल सिंह नेगी को पराजित किया था।
मुख्य संसदीय सचिव से सातवें वित्त आयोग के अध्यक्ष तक का सफर
विधायक बनने के बाद नंद लाल को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। वर्ष 2013 से 2017 तक वह हिमाचल प्रदेश सरकार में मुख्य संसदीय सचिव (CPS) रहे।
वर्ष 2018 से 2022 के दौरान वह विधानसभा की कल्याण और ग्रामीण नियोजन समितियों से जुड़े रहे। इसके अलावा उन्होंने विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष सहित विभिन्न विधायी समितियों में भी जिम्मेदारियां निभाईं।
मार्च 2024 में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने उन्हें सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। इस आयोग की जिम्मेदारी प्रदेश की पंचायतों और नगर निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना था।
व्यक्तिगत जीवन और शिक्षा
नंद लाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को शिमला जिले के रामपुर बुशहर के देवठी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम प्यारे लाल था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (एमए) की शिक्षा प्राप्त की थी। उनका विवाह सत्य देवी से हुआ था और उनका एक पुत्र है।
रामपुर ने खोया अनुभवी जनप्रतिनिधि
नंद लाल के निधन से रामपुर बुशहर ने एक ऐसे जनप्रतिनिधि को खो दिया है, जिन्होंने अपने जीवन का लंबा समय देश की सुरक्षा और बाद में क्षेत्र की जनता की सेवा में समर्पित किया। सुरक्षा बलों में अनुशासन के साथ काम करने से लेकर चार बार विधानसभा पहुंचने और सातवें वित्त आयोग की अध्यक्षता तक का उनका सफर उनकी बहुआयामी कार्यशैली को दर्शाता है।
उनके निधन से कांग्रेस पार्टी, राजनीतिक जगत और रामपुर क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। उनके जाने से क्षेत्र की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति दें।





