शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि लर्निंग लाइसैंस भी कानूनन वैध ड्राइविंग लाइसैंस है। ऐसे में केवल लर्निंग लाइसैंस होने के आधार पर बीमा कंपनी मुआवजा चुकाने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
न्यायाधीश विरेंद्र सिंह की अदालत ने ओरिएंटल इंश्योरैंस कंपनी लिमिटेड की ओर से दायर अपील खारिज करते हुए दुर्घटना पीड़ित पक्ष को मिलने वाले मुआवजे में भी बढ़ोतरी की है। अदालत ने मुआवजे की राशि 33,97,440 रुपए से बढ़ाकर 34,03,030 रुपए कर दी और इसकी पूरी जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर ही बरकरार रखी।
मामले में बीमा कंपनी की दलील थी कि दुर्घटना के समय मोटरसाइकिल चालक के पास नियमित ड्राइविंग लाइसैंस के बजाय केवल लर्निंग लाइसैंस था। कंपनी ने इसे केंद्रीय मोटर वाहन नियमों और बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन बताते हुए मुआवजे की देनदारी से छूट देने की मांग की थी।
अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लर्निंग लाइसैंस धारक को ऐसा व्यक्ति नहीं माना जा सकता जिसके पास कोई वैध ड्राइविंग लाइसैंस ही न हो। फैसले में केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 24(3)(v) का विश्लेषण करते हुए कहा गया कि मोटरसाइकिल के मामले में दोहरे नियंत्रण वाले वाहन में इंस्ट्रक्टर की अनिवार्य मौजूदगी से छूट का प्रावधान लागू होता है।
इस फैसले से सड़क दुर्घटना मुआवजा मामलों में लर्निंग लाइसैंस की कानूनी वैधता को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हुई है। साथ ही बीमा कंपनियों की मुआवजा संबंधी जिम्मेदारी पर भी अदालत ने अहम टिप्पणी की है।
लर्निंग लाइसैंस पर वाहन चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा सुरक्षा का लाभ,हिमाचल हाईकोर्ट



