हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष सेब का उत्पादन पिछले साल की तुलना में लगभग आधा रह गया, जिससे बागवानों को अनुमानित 1,500‑2,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। राज्य में कुल उत्पादन 1.70 करोड़ पेटियों तक सीमित रहने की संभावना है, जबकि 2023‑24 में यह 3.50 करोड़ पेटियों तक पहुंचा था।
उत्पादन में गिरावट और उसके कारण
बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा के अनुसार, अब तक केवल 1.40 करोड़ पेटियां ही बाजार में पहुंच पाई हैं। कुल उत्पादन का अनुमान मंडियों, मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS), सीए स्टोर, राज्य कृषि विपणन बोर्ड और एपीएमसी की खरीद को जोड़कर किया गया है। इस वर्ष मौसम की बेरुखी, बर्फबारी और कम तापमान ने ऊँचाई वाले क्षेत्रों में भी फसल को नुकसान पहुँचाया। परिणामस्वरूप आधिकारिक सेब सीजन 31 अक्टूबर को समाप्त होना था, लेकिन इसे 10 नवंबर तक बढ़ा दिया गया।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
सेब उत्पादन में गिरावट का असर केवल बागवानी तक सीमित नहीं रहा। शिमला सहित कई क्षेत्रों में व्यापारियों की बिक्री में 30‑35 % तक की कमी दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कहा कि बागवानों की आय में गिरावट से स्थानीय बाजार की खरीद शक्ति घट गई है। फल‑फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने बताया कि विभाग ने नुकसान का अनुमान लगभग 1,000 करोड़ रुपये रखा है, पर वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक है।
सेब के साथ-साथ सोने‑चांदी की खरीद पर भी असर पड़ा है। सर्राफा एवं स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष अतुल टांगरी ने कहा कि बागवानों की कम आय के कारण कीमती धातुओं की खरीद घटी, जबकि कीमतों में गिरावट ने कुछ ग्राहकों को राहत दी।
स्रोत: Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | – Amar Ujala






