सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन खारिज की
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा 2024 में पेश किए गए ‘हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट’ से जुड़ी रिव्यू पिटीशन को 29 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। इस निर्णय से राज्य के लगभग 1.50 लाख अनुबंधित कर्मचारियों को उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से ही वेतन, एरियर और वरिष्ठता के अधिकार मिलेंगे।
पिछला इतिहास और हाईकोर्ट का फैसला
2003 से हिमाचल में अनुबंध पर भर्ती शुरू हुई, जिसमें कर्मचारियों को प्रारम्भिक 8 साल तक न्यूनतम वेतन पर रखा जाता था। चुनावी वर्षों में कार्यकाल घटते रहे, जिससे कई कर्मचारियों ने वित्तीय लाभ और वरिष्ठता के लिए न्यायालय में दायरियां कीं। 25 अप्रैल 2026 को हिमाचल हाईकोर्ट ने 2024 के एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया और तीन महीने के भीतर भुगतान का आदेश दिया।
सरकार पर आर्थिक दबाव
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद राज्य को अनुमानित 8,000 करोड़ रुपये अनुबंध अवधि के सेवा लाभ के लिए और समान राशि पेंशनरों के एरियर व भत्तों के लिए भुगतान करना पड़ेगा। कुल मिलाकर वित्तीय बोझ लगभग 16,000 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है, जिससे सरकार के लिए अनुपालन चुनौतीपूर्ण बन गया है। अब न्यायिक रास्ते बंद होने के कारण सरकार को आदेशों के अनुसार सभी पात्र कर्मचारियों को उनके मूल नियुक्ति तिथि से लाभ प्रदान करना अनिवार्य है।
स्रोत: Himachal Abhi Abhi
फीचर्ड इमेज: सांकेतिक तस्वीर (AI द्वारा बनाई गई).




