क्रूड तेल के दाम में तेज़ी
पिछले साल दिसंबर में 5,500 रुपये प्रति बैरल रहे क्रूड तेल की कीमत इस साल 9,500 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इस वृद्धि ने विभिन्न उद्योगों पर दबाव डाला है, विशेषकर दवा निर्माण क्षेत्र में।
दवा उद्योग में कच्चे माल की लागत दोगुनी
तेल के दाम बढ़ने से प्लास्टिक दाने, बोतलें, ढक्कन, पीवीसी प्रिंटिंग फिल्म और एल्युमिनियम फॉइल जैसे पैकेजिंग सामग्री के साथ-साथ डीजल‑पेट्रोल के दाम भी बढ़े हैं। परिणामस्वरूप दवाओं के कच्चे माल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। उदाहरण के तौर पर, पैरासिटामोल का कच्चा माल 250 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 500 रुपये प्रति किलो हो गया है।
छोटे उद्योगों पर असर
कच्चे माल की कीमत में इस उछाल से छोटे और मध्यम आकार के दवा निर्माताओं को विशेष कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जिन कंपनियों ने पहले से ऑर्डर ले रखे थे, उन्हें अब घाटा उठाकर ही उन ऑर्डरों को पूरा करना पड़ रहा है। इस स्थिति ने उद्योग के लाभप्रदता में गिरावट लाई है और भविष्य में उत्पादन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।
स्रोत: Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | – Amar Ujala





