हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते जोखिम
हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, अतिवृष्टि और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि देखी जा रही है। इस संदर्भ में शनिवार को शिमला के होटल पीटरहॉफ में एक राष्ट्रीय संवाद आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने किया।
देश-विदेश के विशेषज्ञों का सहभाग
संवाद में विभिन्न देशों के जलवायु विशेषज्ञों ने भाग लिया और उन्होंने हिमालयी समुदायों को चरम मौसम घटनाओं के लिए तैयार करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने जोखिम आकलन, पूर्वानुमान और सामाजिक-आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियों की आवश्यकता पर बल दिया।
तैयारी पर नया दृष्टिकोण
परम्परागत आपदा राहत के बजाय पहले से तैयारी करने की व्यवस्था बनाने पर विशेष जोर दिया गया। संवाद में CEEW की शोध रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया है कि कैसे हिमालयी समुदाय जलवायु की चरम घटनाओं का पूर्वानुमान लगा सकते हैं और उसके अनुसार स्वयं को ढाल सकते हैं। साथ ही ‘वेदरिंग हाइट्स’ नामक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें हिमाचल प्रदेश के स्थानीय समुदायों के अनुभव दिखाए गए।
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और भारतीय हिमालयी राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी चर्चा हुई। यह समन्वय आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने और जोखिम कम करने में मदद करेगा।
स्रोत: Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | – Amar Ujala
फीचर्ड इमेज: सांकेतिक तस्वीर (AI द्वारा बनाई गई).


