ललित कश्यप, सोलन।
Published by: Ankesh Dogra

Updated Mon, 24 Aug 2026 12:38 PM IST

हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बुरांश पर जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिखने लगा है। नौणी विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार बुरांश के फूल सामान्य समय से 88 से 97 दिन पहले खिल रहे हैं। इससे परागण और बीज बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जंगलों में करीब 32 फीसदी नए पौधे शुरुआती अवस्था में ही खत्म हो जाते हैं। विशेषज्ञों ने सतत दोहन और समुदाय आधारित संरक्षण पर जोर दिया है।

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बुरांश
– फोटो : अमर उजाला



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हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लाल सुर्ख रंगों से वादियां महकाने वाले बुरांश के फुल की दो तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक समय से पहले बुराश की बहार और दूसरी भविष्य में इसके लिए संकट का संकेत। अपनी खूबसूरती और सेहत के लिए फायदेमंद गुणों की वजह से पहचाना जाने वाला यह पेड़ अब घटते जंगलों और मौसम के बदलते मिजाज के कारण धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर पहुंच रहा है। नौणी विवि के विशेषज्ञों के ताजा शोध में सामने आया है कि पहाड़ों में गर्मी बढ़ने के कारण बुरांश के फूल अपने तय समय से करीब 88 से 97 दिन (लगभग 3 महीने) पहले ही खिल रहे हैं।


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