हिमाचल प्रदेश का हिमालयी क्षेत्र अब सिर्फ बर्फ पिघलने की चुनौती ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित निर्माण, भूस्खलन, जंगलों में कमी और बढ़ते मानवीय दबाव से जूझ रहा है। इस दबाव का असर बर्फ, जल स्रोत, नदियों, जंगलों और जैव विविधता पर साफ दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिक अध्ययनों में सामने आया है कि ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में तापमान बढ़ने से बर्फबारी घट रही है और बारिश का हिस्सा बढ़ रहा है। वहीं, भूमि उपयोग में बदलाव और निर्माण गतिविधियां ढलानों को कमजोर कर रही हैं। अगस्त 2026 में प्रकाशित कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने तापमान वृद्धि, बर्फबारी में कमी, भूस्खलन, वन क्षेत्र और कार्बन भंडार में गिरावट की गंभीर तस्वीर सामने रखी है।
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