हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने निजी बस ऑपरेटरों को रूट परमिटों में किए गए संशोधन को वापस लेने के क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) शिमला के फैसले को चुनौती देने वाली 11 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अवमानना याचिका में दिए गए न्यायिक आदेशों के तहत की गई कार्रवाई और समीक्षा बैठक के निर्णयों को अनुच्छेद 226 (रिट याचिका) के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने साफ किया है कि आरटीए शिमला की ओर से 2 नवंबर 2019 को बुलाई गई विशेष समीक्षा बैठक और लिया गया निर्णय पूरी तरह से हाईकोर्ट के 12 सितंबर 2019 के न्यायिक आदेश के तहत था।




यह मामला बसों के रूट बदलने और अदालती आदेशों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता जगदीश ठाकुर और अन्य निजी बस ऑपरेटरों को क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण शिमला की ओर से साल 2018 में उनके स्टेज कैरिज रूट परमिट में संशोधन की मंजूरी दी गई थी। जनवरी 2019 में नया परमिट जारी हुआ। इस संशोधन प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं को लेकर उच्च न्यायालय में 2019 में अवमानना याचिका दायर की गई थी। बस ऑपरेटरों ने याचिका दायर कर आरटीए के फैसले और नोटिस को रद्द करने की मांग की। अदालत ने ऑपरेटरों को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की छूट दी है।

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