हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पार्ट टाइम मल्टीटास्क वर्कर भर्ती विवाद मामले में स्पष्ट किया कि यदि किसी अपीलीय आदेश को बिना गुण-दोष पर रद्द किए पिछली याचिका का निपटारा हो चुका हो और समीक्षा भी खारिज हो गई हो, तो उसी राहत के लिए दोबारा याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। अपीलीय आदेश को चुनौती दिए बिना नौकरी पर बने रहना गैर कानूनी है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने वीणा की याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार को उन्हें तुरंत पद से हटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही परीक्षित को तुरंत नियुक्ति देने और सभी सेवा लाभों के साथ पुनः सेवा में लेने का आदेश दिया है।
सोलन जिले की प्राथमिक पाठशाला चंद्राणी में पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर नीति 2022 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। शुरुआत में चयन समिति ने वीणा को नियुक्ति दी। परीक्षित ने इस चयन के खिलाफ अपील दायर की। 30 जनवरी 2023 को अपीलीय प्राधिकारी ने वीणा के चयन को रद्द कर परीक्षित के पक्ष में फैसला सुनाया, इसके बाद 21 जून 2023 को वीणा की सेवाएं समाप्त कर प्रेषित को नियुक्ति दे दी गई। वीणा ने 2023 में इस अपीलीय आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। 27 जून 2023 को डिवीजन बेंच ने अंतरिम रोक लगा दी, जिसके आधार पर परीक्षित को हटाकर वीणा को पुनः सेवा में रख लिया गया।
21 सितंबर 2023 को हाईकोर्ट ने यह नोट करते हुए कि परीक्षित की सेवाएं समाप्त हो चुकी हैं और वीणा ने दोबारा ज्वाइन कर लिया है, याचिका को निष्प्रभावी मानकर समाप्त कर दिया। अदालत ने पाया कि जब वीणा की पहली याचिका गुण-दोष के आधार पर तय किए बिना और 30 जनवरी 2023 के अपीलीय आदेश को रद्द किए बिना ही समाप्त हो गई, तो वह अपीलीय आदेश कानूनी रूप से स्वतः जीवित हो गया। हाईकोर्ट ने कहा कि जब वीणा की पहली याचिका और उसकी समीक्षा याचिका खारिज हो चुकी थी और उन्हें नई याचिका दाखिल करने की कोई छूट नहीं दी गई थी, तब उन्हीं मांगों के लिए वर्ष 2026 में दोबारा रिट याचिका दाखिल करना पूरी तरह से कानूनन पोषणीय नहीं है।
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