हिमाचल प्रदेश विधानसभा का सत्र मंगलवार को रोजगार के मुद्दे पर गरमाया। कांग्रेस की चार साल में चार लाख को रोजगार देने की चुनावी गारंटी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में हजारों पद खाली हैं, लेकिन युवाओं को रोजगार मिलता नजर नहीं आ रहा। प्रश्नकाल के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद भाजपा ने सरकार पर सदन को गुमराह करने और वास्तविक स्थिति छिपाने का आरोप लगाते हुए वाकआउट कर दिया।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था को कम करने के लिए सरकार नई नीति तैयार करेगी। साथ ही वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों और भविष्य का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 40 और सामान्य वर्ग के लिए 45 प्रतिशत अंक अनिवार्य किए गए हैं। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों को जोड़कर मेरिट तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार में कौशल विकास स्टाइपंड में भी घोटाला हुआ। जहां 15 विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण लिया वहां 50 के नाम पर स्टाइपंड जारी हुआ। अब अगर इसकी जांच भी सरकार ने शुरू करवाई तो विपक्ष हल्ला करेगा।
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