ब्यास नदी के किनारे बसे पंडोह बाजार के लोगों के लिए बाढ़ का खतरा भले ही फिलहाल शांत नजर आ रहा हो, लेकिन वर्ष 2023 की आपदा की यादें अभी भी उन्हें डराती हैं। उस भीषण आपदा में ब्यास नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया था और पंडोह बाजार का निचला हिस्सा पानी में डूब गया था। जान बचाने के लिए लोगों को घर और दुकानें छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा था।
आपदा के बाद पंडोह पहुंचे मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया था कि हालात सामान्य होने के बाद ब्यास नदी किनारे सुरक्षा दीवार का निर्माण करवाया जाएगा। उद्देश्य था कि भविष्य में नदी का पानी बाजार की ओर न पहुंच सके और लोगों व दुकानों को बाढ़ के खतरे से बचाया जा सके। लेकिन तीन साल गुजरने के बाद भी यह आश्वासन जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा दीवार उनके लिए सिर्फ एक वादा बनकर रह गई है। वर्ष 2026 में भी संभावित खतरे के बीच पंडोह बाजार के लोगों को सुरक्षा के लिए मुख्य रूप से सायरन व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उन्हें चिंता है कि यदि अचानक ब्यास का जलस्तर बढ़ा तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए पर्याप्त समय मिल पाएगा या नहीं।
वर्ष 2025 में भी पंडोह के लोगों ने बढ़ते जलस्तर का खतरा झेला था। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात करीब 12 बजे बांध से पानी छोड़े जाने के बाद महज 15 मिनट में पानी बाजार के निचले हिस्से तक पहुंच गया था। अचानक बढ़े खतरे के चलते कई लोग रातभर घरों से बाहर रहने को मजबूर हुए। लोगों ने जरूरी सामान उठाया और सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए।
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