हिमाचल प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और तीन साल तक के नन्हे बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार के कोटे में कटौती कर दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन लाभार्थी श्रेणियों के लिए मिलने वाले सरसों के तेल और शक्कर की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से बंद कर दी है।
नई व्यवस्था के तहत अब आंगनबाड़ी केंद्रों में सरसों के तेल और शक्कर का इस्तेमाल केवल तीन से छह वर्ष तक के नियमित रूप से केंद्र आने वाले बच्चों के लिए खाना पकाकर परोसने में किया जाएगा। यानी गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और तीन साल तक के बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार में अब तेल और शक्कर शामिल नहीं होंगे।
अचानक बदलाव से महिलाओं में नाराजगी
तेल और शक्कर का आवंटन अचानक रोके जाने से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। लाभार्थी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लगातार सवाल कर रही हैं कि जब अन्य राशन और पोषण सामग्री दी जा रही है तो तेल और शक्कर की आपूर्ति क्यों बंद की गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सामने भी लाभार्थियों के सवालों का जवाब देने की चुनौती खड़ी हो गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिलाएं इस बदलाव को लेकर लगातार जानकारी मांग रही हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन की जिला प्रधान सुदेश कुमारी और महासचिव लज्या ठाकुर ने बताया कि महिलाओं में इस फैसले को लेकर सवाल हैं। उनका कहना है कि लाभार्थी पूछ रही हैं कि जब पोषण आहार में अन्य राशन दिया जा रहा है तो तेल और शक्कर की कटौती किस आधार पर की गई है।
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