102 दिन के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शिमला जिला परिषद की सियासत निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जिला परिषद के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया वीरवार सुबह 10:30 बजे बचत भवन में शुरू हो गई। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 25 सदस्यों वाली जिला परिषद की कमान किसके हाथ जाएगी। भाजपा और कांग्रेस दोनों बहुमत से दूर हैं और ऐसे में दो निर्दलीय सदस्य अचानक सबसे अहम हो गए हैं।
जिला परिषद के चुनाव को लेकर सुबह से ही बचत भवन में राजनीतिक हलचल तेज रही। भाजपा समर्थित सदस्य पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनाव स्थल पर पहुंचे। उनके साथ राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार, हर्ष महाजन और भाजपा विधायक बलवीर वर्मा भी मौजूद रहे। वहीं कांग्रेस समर्थित जिला परिषद सदस्य पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और पार्टी नेताओं के साथ बचत भवन पहुंचे।
13 का आंकड़ा, तभी बनेगी बात
शिमला जिला परिषद में कुल 25 निर्वाचित सदस्य हैं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए 13 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा राजनीतिक समीकरण में भाजपा समर्थित 11 और कांग्रेस समर्थित 10 सदस्य हैं। यानी दोनों ही दल बहुमत के जादुई आंकड़े से दो-दो कदम दूर हैं।
यहीं से दो निर्दलीय सदस्यों की अहमियत बढ़ गई है। दोनों निर्दलीय जिस खेमे के साथ जाएंगे, उसका पलड़ा भारी हो सकता है। यही वजह है कि चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दल निर्दलीय सदस्यों के समर्थन को लेकर अपने-अपने दावे कर रहे हैं। हालांकि असली तस्वीर मतदान के बाद ही सामने आएगी।
कांग्रेस ने खोला पत्ता, भाजपा का सस्पेंस बरकरार
अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस की ओर से सुरेंद्र रेटका के नाम की चर्चा है। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय चेहरे को आगे करने की रणनीति भी सामने आ रही है। भाजपा ने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं। पार्टी आखिरी समय में प्रत्याशियों के नाम घोषित कर सकती है।
इससे चुनाव और दिलचस्प हो गया है। उम्मीदवारों के नाम से ज्यादा नजर इस बात पर है कि दोनों दल अपने-अपने खेमे को कितना एकजुट रख पाते हैं। क्योंकि बहुमत का आंकड़ा इतना करीबी है कि एक-दो वोट का बदलाव भी पूरा समीकरण पलट सकता है।
चुनाव से पहले दोनों खेमों ने कसी कमर
चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने जिला परिषद सदस्यों के साथ बैठक कर रणनीति तैयार की। पार्टी ने सदस्यों को एकजुट रहने और क्रॉस वोटिंग से बचने के निर्देश दिए। कांग्रेस खेमे में भी लगातार बैठकों और संपर्क का दौर चला।
कांग्रेस समर्थित जिला परिषद सदस्य मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दिल्ली से लौटने के बाद उनसे मिलने ओक ओवर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने भी सदस्यों को एकजुट रहने का संदेश दिया। यानी चुनाव स्थल तक पहुंचने से पहले ही दोनों दलों ने अपने-अपने मोर्चे मजबूत करने में पूरी ताकत लगा दी थी।
31 मई को सदस्य चुने गए, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का इंतजार जारी रहा
हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव 31 मई को संपन्न हुए थे। चुनाव के बाद शिमला जिला परिषद के सदस्य तो चुन लिए गए, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया। मामला बाद में हाईकोर्ट तक पहुंचा। इससे पहले अगस्त के पहले सप्ताह में भी चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई थी। उस समय दोनों प्रमुख दलों के सदस्यों के बैठक में शामिल नहीं होने से चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब तीसरी बैठक में चुनाव करवाए जा रहे हैं। नियमों के अनुसार 25 सदस्यीय सदन में 13 सदस्यों की मौजूदगी से कोरम पूरा होगा और इसके बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
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