ड्रैगन फ्रूट की बागवानी से नई आय का स्रोत
मंडी जिले के सरकाघाट उपमंडल के भरनाल गांव में दो प्रगतिशील किसान, रूप लाल और टेक चंद, ने पारंपरिक फसलों को छोड़कर ड्रैगन फ्रूट (कमलम) की खेती शुरू की। राज्य सरकार की योजनाओं और बागवानी विभाग के सहयोग से उन्होंने दो बीघा जमीन पर लगभग 400 पौधे लगाकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया।
आर्थिक सफलता और सरकारी समर्थन
रूप लाल ने 2023 में बागवानी विभाग की मदद से जंबो-रेड फ्लेश किस्म के पौधे लगाए। आधुनिक आरसीसी रिंग पोल सपोर्टेड तकनीक और जैविक विधियों के उपयोग से बिना रासायनिक उर्वरकों के उत्पादन संभव हुआ। तीसरे वर्ष में उन्हें पहली व्यावसायिक फसल मिली, जिसमें एक ही सीजन में 5‑6 बार फल तोड़कर लगभग 180 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया। इस बिक्री से दो बीघा जमीन से लगभग दो लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।
टेक चंद ने भी समान आकार की जमीन पर ड्रैगन फ्रूट बगीचा स्थापित किया। उनका मानना है कि सरकारी अनुदान और आधुनिक तकनीकें किसानों की आय को कई गुना बढ़ा सकती हैं।
ड्रैगन फ्रूट की खेती की संभावनाएँ
उद्यान विकास अधिकारी शबनम राणा ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट एक कैक्टस प्रजाति है, जिसे कम पानी की आवश्यकता होती है और यह गर्म जलवायु एवं ढलान वाले क्षेत्रों में उपयुक्त है। एक बार बगीचा स्थापित हो जाने पर उचित देखभाल से 17‑20 वर्षों तक निरंतर उत्पादन संभव है। मिशन फॉर इंटेग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत पात्र बागवानों को स्थापना लागत का 50% तक अनुदान दिया जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही तकनीक, सरकारी योजनाएँ और जैविक तरीकों के संयोजन से ड्रैगन फ्रूट की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सुदृढ़ीकरण का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
स्रोत: Himachal Abhi Abhi




