रामपुर बुशहर। विशेषर नेगी।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना से जहां लोगों को इलाज की उम्मीद रहती है, वहीं रामपुर के एमजीएमएससी खनेरी अस्पताल से सामने आया एक मामला इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
निरमंड क्षेत्र के राहनू निवासी खूब राम पथरी की समस्या से परेशान हैं। परिजनों के अनुसार उपचार के लिए उन्हें खनेरी अस्पताल लाया गया था। उनका कहना है कि चिकित्सकों की प्रक्रिया के बाद मरीज को ऑपरेशन के लिए ऑपरेशन थिएटर तक भी ले जाया गया, लेकिन ऐन वक्त पर ऑपरेशन नहीं किया गया।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि इसी दौरान डॉ. राजेश्वर ने कथित तौर पर मरीज से कहा कि “आयुष्मान कार्ड है तो ऑपरेशन नहीं करूंगा।” हालांकि, इस कथित बयान और ऑपरेशन नहीं किए जाने के पीछे अस्पताल की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मरीज का ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत होना था, तो क्या योजना से संबंधित किसी तकनीकी, प्रशासनिक या अन्य कारण के चलते उपचार रोका गया? या फिर इसके पीछे कोई चिकित्सकीय वजह थी? इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रशासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
परिजनों का कहना है कि यदि आयुष्मान कार्ड ही ऑपरेशन से इनकार का कारण बना, तो यह गंभीर विषय है और इसकी जांच होनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि मरीज को ऑपरेशन की प्रक्रिया तक ले जाने के बाद वापस भेजे जाने से परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
आयुष्मान कार्ड गरीब परिवार के लिए इलाज का सहारा है। ऐसे में किसी मरीज के उपचार में इसका इस्तेमाल किस तरह और किन परिस्थितियों में किया गया, यह पारदर्शी तरीके से स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
अब इस मामले में खनेरी अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष महत्वपूर्ण हो गया है। यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ सकती है, वहीं यदि ऑपरेशन न किए जाने के पीछे कोई चिकित्सकीय या प्रशासनिक कारण था तो उसे भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
फिलहाल यह मामला आरोप और अस्पताल के संभावित स्पष्टीकरण के बीच है। मरीज और उसके परिवार को न्यायसंगत उपचार मिले तथा पूरे घटनाक्रम की वास्तविक वजह सामने आए—यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
