हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड में लेट फीस जमा न करवाने के कारण रोके सर्टिफिकेट अब विद्यार्थियों को बिना शपथ पत्र के नहीं मिलेंगे। प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए अभ्यर्थी को कार्यकारी मजिस्ट्रेट से सत्यापित शपथ पत्र देना होगा। इसके साथ ही परिणाम घोषित होने की तिथि से प्रमाणपत्र या फीस जमा करवाने की तिथि तक 500 रुपये प्रति वर्ष की दर से अतिरिक्त शुल्क भी चुकाना होगा। बोर्ड ने अतिरिक्त शुल्क की अधिकतम सीमा 5,000 रुपये तय की है।
यह नियम री-इवैल्यूएशन, री-चेकिंग, इम्प्रूवमेंट ऑफ परफॉर्मेंस या अन्य कारणों से रोके प्रमाणपत्रों पर लागू होगा। संशोधित प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए दिए जाने वाले शपथ पत्र में अभ्यर्थी को घोषणा करनी होगी कि वह बोर्ड की ओर से पहले जारी अंतिम मेरिट सूची में किसी तरह के बदलाव का दावा नहीं करेगा। इसके अलावा अभ्यर्थी को यह भी हलफनामा देना होगा कि संबंधित अवधि में उसने किसी अन्य बोर्ड या विश्वविद्यालय से संबंधित या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है। अतिरिक्त लेट फीस की गणना परिणाम घोषित होने की तिथि से प्रमाणपत्र या शुल्क जमा करवाने की तिथि तक की जाएगी। इस अवधि के आधार पर 500 रुपये प्रति वर्ष शुल्क लिया जाएगा, लेकिन किसी भी स्थिति में यह राशि 5,000 रुपये से अधिक नहीं होगी। बोर्ड ने परीक्षा विनियम में इसको लेकर नया नियम जोड़ा है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 1968 की धारा 19(3) के तहत परीक्षा विनियम, 1994 के अध्याय-6 के मुख्य नियम 6.2 में नया नियम 6.2.4 जोड़ा है। इसके तहत लेट फीस के कारण रोके गए सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए अभ्यर्थियों को निर्धारित शुल्क के साथ शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
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