ब्लड ग्रुप मैच नहीं होने के कारण अंग प्रत्यारोपण में आने वाली बड़ी बाधा अब दूर हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में जल्द ही स्वैप प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके तहत अलग-अलग अंगदाता और मरीज की दो जोड़ियों के बीच अंगों की अदला-बदली की जाएगी, जिससे दोनों मरीजों का प्रत्यारोपण संभव हो सकेगा।

राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन, हिमाचल विंग ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रदेश में स्वैप प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। इससे खासतौर पर उन मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनके लिए अंगदाता उपलब्ध होने के बावजूद ब्लड ग्रुप मैच नहीं होने की वजह से प्रत्यारोपण संभव नहीं हो पाता।

कैसे काम करेगा स्वैप प्रत्यारोपण?

स्वैप प्रत्यारोपण में दो अलग-अलग अंगदाता-मरीज जोड़ियों को शामिल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर पहली जोड़ी में उपलब्ध अंगदाता का ब्लड ग्रुप अपने मरीज से मैच नहीं करता, जबकि दूसरी जोड़ी में भी यही स्थिति होती है। ऐसे में यदि दोनों जोड़ियों के अंगदाता दूसरे मरीज के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं, तो अंगों की अदला-बदली के माध्यम से दोनों मरीजों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है। इस व्यवस्था से ऐसे मरीजों के लिए प्रत्यारोपण की संभावना बढ़ सकती है, जिन्हें ब्लड ग्रुप असंगतता के कारण अपने उपलब्ध अंगदाता से अंग नहीं मिल पाता।

Source: Read original article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *