हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों की पोस्टिंग और तबादला प्रक्रियाओं में मेरिट की अनदेखी करने पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए राज्य शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता प्रिंसिपल को उनकी मेरिट के आधार पर मनपसंद स्टेशन पर तुरंत कार्यभार ग्रहण करवाया जाए। यह अहम आदेश न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने दिनेश कुमार डोगरा से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। अदालत ने कहा कि शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करे कि याचिकाकर्ता को शहीद विजय पाल मेमोरियल पीएम श्री मुख्यमंत्री आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घुमारवीं (बिलासपुर) में तुरंत जॉइन करने की अनुमति दी जाए।
कोर्ट ने सरकार और अन्य संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए आगामी तिथि से पहले अपना विस्तृत जवाब दायर करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई एक अक्तूबर को होगी। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी मेरिट के आधार पर एक विशिष्ट स्टेशन (स्कूल) का चयन किया था। हालांकि, विभाग ने उनकी वरिष्ठता और मेरिट दरकिनार करते हुए उनसे कम अंक/मेरिट वाले एक अन्य अभ्यर्थी (निजी प्रतिवादी) को वह स्टेशन आवंटित कर दिया। यह स्टेशन जिला बिलासपुर का चर्चित शहीद विजय पाल मेमोरियल पीएम श्री मुख्यमंत्री आदर्श राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, घुमारवीं है, जो सीबीएसई बोर्ड से संबद्धता और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के तहत आता है। अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के साथ मेरिट के आवंटन में अनदेखी हुई है।
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