हिमाचल में पति-पत्नी विवाद, भरण-पोषण और बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामलों में देरी को लेकर हुए अध्ययन में कई चुनौतियां सामने आई हैं। शिमला, धर्मशाला और मंडी की फैमिली कोर्ट के विश्लेषण में बार-बार तारीखें, प्रशिक्षित काउंसलरों की कमी, अतिरिक्त न्यायिक प्रभार और आधारभूत सुविधाओं का अभाव प्रमुख समस्याएं बताए गए हैं। अध्ययन ने स्थायी काउंसलर और बेहतर मध्यस्थता व्यवस्था की जरूरत बताई है।

फैमिली कोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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