अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra

Updated Mon, 17 Aug 2026 11:43 AM IST

हिमाचल के चार पहाड़ी क्षेत्रों के अध्ययन में तेजी से बढ़ते निर्माण और घटती हरियाली की तस्वीर सामने आई है। 1980 से 2024 के बीच बजौरा में निर्मित क्षेत्र 44%, धमून में 43%, पंडोह में 38% और शोघी में 24% बढ़ा। वहीं धमून, पंडोह और शोघी में पेड़ों का क्षेत्र घटा। अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन और अनियोजित शहरीकरण को पहाड़ों के लिए बढ़ता खतरा बताया है।


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पहाड़ों पर बढ़ता कंक्रीट का बोझ।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क



विस्तार

शिमला से थोड़ी ही दूर शोघी में पहाड़ों का बदला हुआ मिजाज साफ दिखाई देता है। जहां कभी जंगल और प्राकृतिक ढलानें थीं, वहां सड़कें, भवन और पर्यटन प्रोजेक्ट तेजी से बढ़ रही हैं। दूसरी ओर बदलते मौसम के साथ भारी बारिश, भूस्खलन और पानी की कमी का खतरा भी बढ़ रहा है। यही तस्वीर शिमला के अलावा मंडी, कुल्लू और प्रदेश के दूसरे शहरों से सटे गांवों में भी नजर आ रही है। नए अध्ययन में इसे जलवायु बदलाव और बेतरतीब शहरीकरण का दोहरा खतरा बताया गया है।


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