संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Krishan Singh

Updated Thu, 20 Aug 2026 06:00 AM IST

 हाईकोर्ट ने राज्य में न्यायिक बुनियादी ढांचे,नई अदालतों के गठन और सहायक कर्मचारियों की भर्ती में राज्य सरकार की ओर से की जा रही आना-कानी और वित्तीय तंगी की दुहाई पर कड़ा रुख अपनाया है। 


High Court Stated that the establishment of courts and the filling of posts cannot be halted under the pretext

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय।
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में न्यायिक बुनियादी ढांचे,नई अदालतों के गठन और सहायक कर्मचारियों की भर्ती में राज्य सरकार की ओर से की जा रही आना-कानी और वित्तीय तंगी की दुहाई पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को अगले आदेश से पहले आवश्यक कदम उठाने का सख्त निर्देश जारी किया है।पीठ ने कहा कि वर्षों से लंबित इन मांगों और तर्कसंगत जरूरतों पर फैसला न लेना दुखद है। कोर्ट के पास सरकार को तुरंत पदों के सृजन और स्टाफ बहाली का परमादेश जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हाईकोर्ट की सिफारिशों के विपरीत राज्य सरकार ने 10 अगस्त 2026 की अधिसूचना के तहत स्थायी लोक अदालतों में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीशों को अंशकालिक सदस्य के रूप में अधिसूचित कर दिया है,जो कि एक बहु-सदस्यीय संस्था के नियमों के विपरीत है। कोर्ट ने इस अधिसूचना में तुरंत सुधार करने को कहा है।मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।


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