प्रदेश में कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और वित्तीय लाभों में अनुबंध सेवा अवधि को जोड़ने से जुड़े मामलों में अब फील्ड स्तर के अधिकारी स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले सकेंगे। राज्य सरकार ने प्रशासनिक आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि ताज मोहम्मद मामले और इससे जुड़े न्यायिक फैसलों के आधार पर आने वाले सभी मामलों की जांच और निर्णय संबंधित प्रशासनिक विभाग के स्तर पर सचिवालय में ही किए जाएंगे। बुधवार को कार्मिक विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा है कि हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्त अधिनियम-2024 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 25 अप्रैल 2026 को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) भी 29 जुलाई 2026 को खारिज हो चुकी है। ऐसे में न्यायालयों के फैसलों के संदर्भ में प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।