हिमाचल में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से आईएएस, आईपीएस और आईएफएस का कैडर कम करने की जरूरत जताने के बाद ब्यूरोक्रेसी में शीर्ष पर रहे कुछ अधिकारियों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। पूर्व मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में यह देखना होगा कि क्या प्रशासनिक ढांचा, इकाइयां व इनकी स्थिति कम हुई हैं। अगर हुई हैं तो कैडर कम करना उचित लगता है। इस फैसले से अधिकारियों का प्रमोशन का चैनल प्रभावित होगा। पूर्व मुख्य सचिव वीसी फारका ने कहा कि हर पांच साल बाद आईएएस का कैडर रिव्यू होता है।
उस समय राज्य सरकार केंद्र सरकार के समक्ष अपनी बात रख सकती है। आईएएस अधिकारियों का वेतन का खर्च भारत सरकार वहन करती है। ऐसे में खर्च घटाने वाली कोई बात नहीं है। पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण श्रीधर ने कहा कि कैडर हर चार-पांच साल रिव्यू होता है। देखना होगा कि सरकार यह फैसला स्टडी करने के बाद ले रही है या इंपल्सिव है। इससे पदोन्नतियों के पद भी घटेंगे। पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. विनोद धवन ने कहा कि स्टाफ युक्तिकरण से होना चाहिए। देखना जरूरी है कि सर्विस डिलीवरी में किसका रोल है।
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