संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Krishan Singh

Updated Mon, 17 Aug 2026 08:23 PM IST

 प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि महज शादी से इन्कार करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता, जब तक ऐसा कृत्य आईपीसी के तहत किसी अपराध की श्रेणी में न आता हो।

Himachal High Court rules refusing marriage does not amount to abetment of suicide.

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला



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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि महज शादी से इन्कार करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता, जब तक ऐसा कृत्य आईपीसी के तहत किसी अपराध की श्रेणी में न आता हो। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत दोषसिद्धि के लिए आरोपित की ओर से ऐसा प्रत्यक्ष कृत्य होना जरूरी है, जिससे पीड़ित के सामने आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प न बचा हो। अदालत ने बिलासपुर की एक युवती की आत्महत्या के मामले में आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया। 


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