
अस्थायी शिविर में भौर के बाद प्राकृतिक स्त्रोत के जल से स्नान करते देवता के पुजारी।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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अस्थायी शिविर में भौर के बाद प्राकृतिक स्त्रोत के जल से स्नान करते देवता के पुजारी।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और सेवा से जुड़ी परंपराएं विशेष महत्व रखती हैं। ढालपुर मैदान में सात दिनों तक अस्थायी शिविरों में विराजमान सैकड़ों देवी-देवताओं की दिनचर्या निर्धारित देव नियमों के अनुसार चलती है। भोर होते ही देवताओं के स्नान की तैयारी शुरू हो जाती है। स्नान के लिए नल के पानी के बजाय पहाड़ों के प्राकृतिक जलस्रोतों से लाया गया जल इस्तेमाल किया जाता है।
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