हिमाचल समेत देशभर में 70 फीसदी हृदय रोगियों के पास उपचार करवाने का सुरक्षा कवच कमजोर है। प्रदेश में 10 में से सात मरीजों के पास किसी भी प्रकार का स्वास्थ्य बीमा या वित्तीय सुरक्षा नहीं हैं। हैरत की बात तो यह है कि कई मरीजों को संपत्ति बेचकर उपचार करवाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा हार्ट फेलियर से संबंधित बीमारी का उपचार करवाने के लिए कई मरीज कर्ज तले दब चुके हैं, क्योंकि उनका लंबा उपचार चलता है। मरीजों को कई बार अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि गंभीर बीमारी के उपचार के लिए सरकार की ओर से भी कोई अलग से बीमा योजनाएं नहीं चलाई गई हैं। इस कारण मरीजों के हर साल लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. प्रकाश चंद नेगी ने देश के कार्डियोलॉजिस्ट्स के साथ मिलकर यह अध्ययन किया है।