शिमला। जीवन में अपनों को खोने के बाद अकेली पड़ गई मीरा के लिए अब उम्मीद की एक नई राह खुली है। करीब एक महीने की लगातार कोशिशों और आवश्यक सरकारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद निष्काम सृजन फाउंडेशन ने मीरा को मशोबरा स्थित नारी निकेतन सदन में सुरक्षित पहुंचाया।
मीरा ने अपने माता-पिता और भाई को खो दिया था। इसके बाद उसकी देखभाल और भविष्य को लेकर स्थायी सहारे का अभाव था। उसकी भाभी ने अपनी परिस्थितियों के अनुसार मीरा की जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया, लेकिन आगे यह जिम्मेदारी उठाना उनके लिए संभव नहीं था। ऐसे में फाउंडेशन ने मीरा के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक आश्रय की व्यवस्था करने की पहल की।
फाउंडेशन के अनुसार, मीरा को नारी निकेतन तक पहुंचाने की प्रक्रिया में संबंधित विभागों और अधिकारियों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। आवश्यक औपचारिकताओं और प्रक्रिया को पूरा करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से वहां दाखिल कराया गया।
फाउंडेशन के सदस्यों ने बताया कि नारी निकेतन में मीरा को सुरक्षित वातावरण मिलने से उन्हें काफी संतोष हुआ। वहां रह रही महिलाओं की देखभाल और उनके प्रति अपनापन देखकर फाउंडेशन को भरोसा मिला कि मीरा को यहां आगे के जीवन के लिए बेहतर माहौल मिल सकेगा।
निष्काम सृजन फाउंडेशन ने इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों का आभार जताया है। फाउंडेशन का कहना है कि समाज में ऐसे कई लोग हैं जो परिस्थितियों के चलते अकेले पड़ जाते हैं और उन्हें सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि सुरक्षा, अपनापन और सम्मान की भी जरूरत होती है।
मीरा के लिए नारी निकेतन में पहुंचना उसके जीवन के एक कठिन अध्याय के बाद नई शुरुआत माना जा रहा है। फाउंडेशन ने उम्मीद जताई कि वह यहां सुरक्षित वातावरण में अपने जीवन को नई दिशा दे सकेगी और आने वाले समय में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ पाएगी।
फाउंडेशन ने समाज से भी अपील की कि ऐसे जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखें और जहां संभव हो, उनके जीवन में उम्मीद की एक किरण बनने का प्रयास करें।
