अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra

Updated Tue, 01 Sep 2026 11:08 AM IST

हिमाचल के पुराने चीड़ के जंगल संकटग्रस्त गिद्धों के लिए जीवनदायी साबित हो रहे हैं। कांगड़ा में चार साल के अध्ययन में 553 पेड़ों पर 617 सक्रिय घोंसले मिले, जबकि करीब 80 फीसदी घोंसले 600 से 800 मीटर की ऊंचाई पर पाए गए। शोध ने साफ किया है कि बड़े और पुराने चीड़ के पेड़ों का संरक्षण गिद्धों की आबादी बचाने के लिए बेहद जरूरी है।


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हिमाचल में गिद्धों पर अध्ययन।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क



विस्तार

हिमाचल प्रदेश के जंगलों में बड़े और पुराने चीड़ के पेड़ गिद्धों के प्रमुख आशियाने बने हुए हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से संबद्ध रहे मल्याश्री भट्टाचार्य और गौतम तालुकदार के शोध में सामने आया है कि संकटग्रस्त सफेद पीठ वाले गिद्ध घोंसला बनाने के लिए खासतौर पर पुराने और मोटे चीड़ के पेड़ों को पसंद करते हैं। कांगड़ा में वर्ष 2020 से 2024 के बीच किए गए अध्ययन में 17 गिद्ध बस्तियों में 617 सक्रिय घोंसले मिले। ये घोंसले 553 पेड़ों पर बनाए गए। शोधपत्र हिमाचल प्रदेश में सफेद पीठ वाले गिद्ध के घोंसला स्थल का चयन और घोंसले वाली बस्तियों पर खतरे में यह जानकारी सामने आई है। यह शोधपत्र फॉरेस्ट इकॉलॉजी एंड मैनेजमेंट में छापा गया है। 


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