शिमला, 22 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश में कुपोषण की समस्या से निपटने और लोगों के पोषण स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पोषण नीति-2026 को मंजूरी दी है। इस नीति में पारंपरिक खानपान, स्थानीय खाद्य संसाधनों और पोषक तत्वों से भरपूर आहार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।
नीति का मुख्य उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण संबंधी कमियों को दूर करना है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और पोषण सेवाओं को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
पारंपरिक अनाज और स्थानीय खाद्य पदार्थों को मिलेगा बढ़ावा
नई नीति के तहत हिमाचल प्रदेश में उपलब्ध पारंपरिक अनाज, दालों, मोटे अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दैनिक भोजन का हिस्सा बनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय खाद्य परंपराओं को संरक्षित करने के साथ संतुलित और पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर रहेगा फोकस
नीति में कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं की रोकथाम को प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण संबंधी कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर रहेगा। साथ ही, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से जरूरतमंद वर्गों तक पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की तैयारी
सरकार की इस पहल से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। स्थानीय अनाज और पारंपरिक खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
हालांकि, नीति की वास्तविक सफलता इसके जमीनी क्रियान्वयन, विभागों के बीच तालमेल और आम लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई नीति के माध्यम से पोषण सेवाओं को किस तरह मजबूत किया जाता है और कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।
