
जाने-माने कृषि विशेषज्ञ डॉ. एसएस चहल।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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जाने-माने कृषि विशेषज्ञ डॉ. एसएस चहल।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
हिमाचल प्रदेश की करीब 5000 करोड़ रुपये की बागवानी अर्थव्यवस्था पर विदेशी पौधों के साथ बीमारियां आने और घटिया दवाओं के इस्तेमाल से बड़ा खतरा मंडरा रहा है। संभले नहीं तो इस राज्य की सेब बागवानी का भी कपास की खेती जैसा हाल हो सकता है, जैसा पंजाब और हरियाणा में हुआ है। वहां कभी यह प्रमुख फसल थी। यह चेतावनी देश के प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ डॉ. एसएस चहल ने दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल को फ्रूट बाउल ऑफ इंडिया कहा जाता है, लेकिन सेब उत्पादन मेें गिरावट और वर्तमान स्थिति चिंताजनक है।
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