विजिलेंस मामलों की जांच में अब डिजिटल और मोबाइल फोरेंसिक से लेकर साक्ष्यों के दस्तावेजीकरण और चार्जशीट तैयार करने तक हर स्तर पर गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया जाएगा। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से जांच अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी मामले की जांच करीब 80 फीसदी पूरी होने पर ड्राफ्ट चार्जशीट तैयार कर अभियोजन या कानूनी राय ली जाए। इससे जांच में रह गई संभावित कमियों को समय रहते दूर किया जा सकेगा।

विजिलेंस मामलों की जांच को अधिक पेशेवर और प्रभावी बनाने के लिए 16 और 17 सितंबर को विजिलेंस मुख्यालय शिमला में दो दिवसीय एकीकृत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया गया।

इसमें राज्य विजिलेंस ब्यूरो और पुलिस की अन्य इकाइयों के करीब 25 जांच एवं पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण में साक्ष्यों की गुणवत्ता, वैज्ञानिक जांच, सही दस्तावेजीकरण और अदालत में मामलों को मजबूती से प्रस्तुत करने के तरीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को डिजिटल और मोबाइल फोरेंसिक, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती तथा हस्तलेख और हस्ताक्षर के नमूने लेने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इसके साथ लोक निर्माण विभाग से जुड़े मामलों की जांच, प्री-ट्रैप और ट्रैप कार्रवाई, पोस्ट-ट्रैप प्रक्रिया और उसके दस्तावेजीकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। अधिकारियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार, भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों, आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच, दोषमुक्ति के कारणों और जांच में रह जाने वाली कमियों के बारे में भी बताया गया।

स्टेटमेंट ए से डी तैयार करने और ई-साक्ष्य के प्रभावी इस्तेमाल के तरीके भी समझाए गए। सीडीटीआई चंडीगढ़, एफएसएल जुन्गा, अभियोजन विभाग, लोक निर्माण विभाग और राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। प्रशिक्षण के समापन सत्र में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरवीर सिंह राठौर ने ट्रैप और अन्य संवेदनशील विजिलेंस मामलों की जांच को लेकर अधिकारियों को व्यावहारिक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि पेशेवर दृष्टिकोण, पारदर्शिता, निष्पक्षता और त्वरित जांच सफल जांच के प्रमुख आधार हैं। साक्ष्यों की स्पष्ट कड़ी बनाए रखने और जांच की प्रत्येक कार्रवाई का सावधानीपूर्वक दस्तावेजीकरण करना बेदह जरूरी है। एसपी एसआईयू विजिलेंस विरेंद्र कालिया ने भी सत्र को संबोधित किया। डीजीपी एवं राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रमुख अशोक तिवारी डीजीपी ने पेशेवर, साक्ष्य आधारित, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पर जोर दिया।

 

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