हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में केलांग के पास स्थित पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत एक बार फिर चर्चा में है। वजह सिर्फ इसकी धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि गुरुवार को यहां हुई दर्दनाक घटना भी है। ड्रिलबुरी की कोरा यानी परिक्रमा के दौरान अचानक बर्फबारी और फिसलन के बीच दो बुजुर्ग महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई। कई अन्य श्रद्धालु घायल हुए और उन्हें उपचार के लिए केलांग अस्पताल पहुंचाया गया।

आखिर कहां है ड्रिलबुरी?

ड्रिलबुरी पर्वत लाहौल-स्पीति जिला मुख्यालय केलांग के सामने स्थित पवित्र पर्वत है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसकी धार्मिक परिक्रमा करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्र में होती है। वहीं अन्य रिपोर्टों में ड्रिलबु री की ऊंचाई करीब 4,400 मीटर बताई गई है। ऊंचाई अधिक होने के कारण यहां मौसम तेजी से बदल सकता है। सितंबर में हुई इस धार्मिक यात्रा के दौरान भी सुबह अचानक बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे मार्ग पर फिसलन बढ़ गई और श्रद्धालुओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

क्या है ड्रिलबुरी की कोरा?

तिब्बती बौद्ध परंपरा में किसी पवित्र पर्वत या धार्मिक स्थल की परिक्रमा को कोरा कहा जाता है। श्रद्धालु निर्धारित मार्ग पर पैदल चलते हुए पर्वत की परिक्रमा करते हैं। इसे धार्मिक आस्था और साधना से जोड़कर देखा जाता है। ड्रिलबुरी की कोरा भी इसी परंपरा का हिस्सा है। इस यात्रा में श्रद्धालु ऊंचाई वाले कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरते हैं। इसलिए यहां धार्मिक आस्था के साथ मौसम और ऊंचाई की चुनौती भी बनी रहती है।

क्यों पवित्र माना जाता है ड्रिलबुरी?

ड्रिलबुरी को बौद्ध परंपरा में एक महत्वपूर्ण पवित्र पर्वत माना जाता है। यहां की कोरा श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक साधना का अवसर है। उपलब्ध धार्मिक स्रोतों के अनुसार ड्रिलबुरी को चक्रसंवर से जुड़ा पवित्र पर्वत माना जाता है और इसकी परिक्रमा को आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है। इस यात्रा को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि इन मान्यताओं को आस्था और धार्मिक परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

Source: Read original article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed