हिमाचल प्रदेश में फ्लैट खरीदने और बेचने वालों के लिए अब संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संबंधित फ्लैट की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री से पहले नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की सहमति लेना जरूरी किया गया है। इसके बाद ही राजस्व विभाग रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।

नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री करवाने के लिए तहसीलदार कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को पहले नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग से सहमति लेने के लिए भेजा जा रहा है। विभाग संबंधित भवन और उसमें बने फ्लैट की वैधता से जुड़े पहलुओं की जांच करेगा।

स्वीकृत नक्शे और निर्माण की होगी जांच

नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग यह देखेगा कि संबंधित भवन का नक्शा स्वीकृत है या नहीं और भवन का निर्माण निर्धारित नियमों के अनुसार किया गया है या नहीं। खास तौर पर स्वीकृत नक्शे में बदलाव, अतिरिक्त मंजिल का निर्माण या अन्य निर्माण नियमों के उल्लंघन की स्थिति की जांच की जाएगी। यदि भवन में स्वीकृत योजना से अलग निर्माण पाया जाता है तो संपत्ति की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

हिमाचल सरकार के आधिकारिक भवन योजना अनुमति पोर्टल के अनुसार, नियोजन, विशेष या घोषित नियोजन क्षेत्र में निर्माण अथवा विकास गतिविधि के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक है। पोर्टल पर यह भी उल्लेख है कि भूमि के उपविभाजन से जुड़े कुछ हस्तांतरण दस्तावेजों का पंजीकरण संबंधित स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता।

फ्लैट बेचने से पहले दस्तावेज जांचना जरूरी

इस व्यवस्था का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो अपना फ्लैट बेचने की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें रजिस्ट्री से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस भवन में फ्लैट स्थित है, उसका निर्माण स्वीकृत योजना और लागू नियमों के अनुरूप है। खरीदारों के लिए भी संपत्ति के दस्तावेजों और भवन की स्वीकृत स्थिति की जांच महत्वपूर्ण हो जाएगी। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग से सहमति मिलने के बाद ही राजस्व विभाग रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।

अवैध निर्माण पर लगाम लगाने की कोशिश

सरकार की इस प्रक्रिया का उद्देश्य नियमों के विपरीत बने भवनों और अवैध निर्माण वाली संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर अंकुश लगाना बताया जा रहा है। कई बार भवन निर्माण के दौरान स्वीकृत नक्शे में बदलाव कर दिया जाता है या स्वीकृत क्षमता से अधिक मंजिलों का निर्माण कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में संपत्ति खरीदने वाले व्यक्ति को बाद में कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नई व्यवस्था में रजिस्ट्री से पहले ही भवन की स्थिति की जांच किए जाने से ऐसी संपत्तियों की पहचान प्रक्रिया के शुरुआती चरण में हो सकेगी।

राजेश धर्माणी ने कही यह बात

नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री के लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की सहमति को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर राजस्व विभाग के साथ पहले भी चर्चा हो चुकी है। इस व्यवस्था के बाद संपत्ति की खरीद-फरोख्त में राजस्व विभाग और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के बीच समन्वय की भूमिका बढ़ जाएगी।

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