हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के एमबीए ग्रामीण विकास विभाग की ओर से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए व्यक्तिगत परिवर्तन और मानवीय क्षमता विषय पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, नेतृत्व क्षमता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, करियर विकास, प्रतिभा पहचान और भविष्य की कार्य परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक कौशल विकसित करना रहा।
कार्यक्रम का समन्वय एमबीए ग्रामीण विकास के समन्वयक डॉ. रणधीर रांटा ने किया। विशेष सत्र में एसएनजीएनसी, आईजीएमसी शिमला के डॉ. बी. एस. चौहान मुख्य वक्ता और विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए। आयोजन को सफल बनाने में नैन्सी, आकांक्षा, चातली और मुस्कान ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. बी. एस. चौहान ने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना या परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी में अलग-अलग तरह की क्षमताएं, रुचियां, व्यक्तित्व संबंधी विशेषताएं, भावनात्मक कौशल और सीखने की अपनी शैली होती है। उचित मार्गदर्शन, परामर्श और अवसरों के माध्यम से इन क्षमताओं को विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने व्यक्तिगत परिवर्तन को व्यक्तिगत विकास, व्यावसायिक सफलता और समाज में सार्थक योगदान की महत्वपूर्ण शुरुआत बताया। विद्यार्थियों को अपनी खूबियों को पहचानने, कमियों में सुधार करने, भावनात्मक बुद्धिमत्ता बढ़ाने, संवाद और नेतृत्व क्षमता मजबूत करने तथा कठिन परिस्थितियों में अनुकूलन की क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।
मानवीय क्षमता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा
सत्र में मानवीय क्षमता को भी विस्तार से समझाया गया। डॉ. चौहान ने कहा कि किसी व्यक्ति की क्षमता केवल उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं होती। सोचने की क्षमता, रचनात्मकता, भावनात्मक समझ, दूसरे लोगों के साथ संबंध बनाने की क्षमता, संवाद, नेतृत्व, समस्या समाधान, उद्यमिता और सीखने की प्रवृत्ति भी व्यक्ति की समग्र क्षमता का हिस्सा हैं।
एमबीए ग्रामीण विकास के विद्यार्थियों के लिए यह विषय विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया, क्योंकि उन्हें भविष्य में ग्रामीण समुदायों, उद्यमियों, सरकारी संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों, विकास एजेंसियों और सामाजिक संस्थाओं के साथ काम करना पड़ सकता है। ऐसे क्षेत्र में प्रबंधन ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, प्रभावी संवाद, नेतृत्व, सामुदायिक जुड़ाव और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को समझने की क्षमता भी आवश्यक होती है।
डॉ. चौहान ने विद्यार्थियों के सामने विकास की एक सरल कार्यप्रणाली रखी—खुद को जानें, अपनी क्षमता पहचानें, कौशल विकसित करें, नेतृत्व क्षमता बनाएं, वास्तविक समस्याओं का समाधान करें और सामाजिक प्रभाव पैदा करें। उन्होंने कहा कि प्रबंधन शिक्षा का अंतिम उद्देश्य ऐसे पेशेवर तैयार करना होना चाहिए, जो अपने ज्ञान को व्यावहारिक समाधान में बदल सकें और समाज के लिए सार्थक योगदान दे सकें।
डिजिटल तकनीक और प्रतिभा पहचान पर गतिविधियां
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए डिजिटल तकनीक और विभिन्न आकलन विधियों से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों की रुचियों, क्षमताओं, सीखने की प्राथमिकताओं और व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं को समझने में सहायता करना था।
कुछ विद्यार्थियों ने कराडा स्कैन और शरीर विश्लेषण तकनीक के प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जबकि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने मनोवैज्ञानिक आकलन गतिविधियों में भाग लिया। इनमें तरुण, अंशुल शर्मा, निश्चिल खंड, गौरव कुमार, शिवानी नेगी, अविता, राधिका, अभिषेक, रुचिका ठाकुर, पल्लवी, वर्षा चौधरी, अनुज राणा, प्रिया ठाकुर, अमित कुमार, रुचि और नेहा देवी सहित अन्य विद्यार्थी शामिल रहे। डीएमआईटी आधारित आकलन में पल्लवी, रुचिका, रुचि, प्रिया ठाकुर, अनुज राणा, अनुपम, अमित कुमार, अंशुल शर्मा, वरुण शर्मा और सौरभ ने भाग लिया।
विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि इस तरह के आकलन को भविष्य तय करने वाला अंतिम आधार नहीं माना जाना चाहिए। इन्हें आत्म-मूल्यांकन, करियर की संभावनाओं को समझने और मार्गदर्शन के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल आकलन तब अधिक उपयोगी हो सकता है, जब उसे शैक्षणिक रिकॉर्ड, शिक्षकों के अवलोकन, विद्यार्थी से बातचीत, कौशल आकलन और व्यावसायिक परामर्श के साथ जोड़ा जाए।
शिक्षकों की भूमिका भी अहम
कार्यक्रम में शिक्षक विकास पर भी चर्चा हुई। डॉ. चौहान ने कहा कि विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचानने और उन्हें वास्तविक कौशल में बदलने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि संरचित मार्गदर्शन, व्यावहारिक सीखने, आत्मचिंतन से जुड़ी गतिविधियों, उदाहरण आधारित अध्ययन और करियर विकास संबंधी कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और पेशेवर तैयारी को बढ़ाया जा सकता है। शिक्षक विकास के तहत भावनात्मक बुद्धिमत्ता, विद्यार्थी मार्गदर्शन, संवाद, नेतृत्व, विवाद प्रबंधन, परामर्श, शिक्षण में नवाचार और करियर मार्गदर्शन जैसे विषयों को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
डॉ. रणधीर रांटा ने कहा कि स्नातकोत्तर स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि इस चरण में विद्यार्थी अपने करियर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ रहे होते हैं और उन्हें तेजी से बदलते तथा प्रतिस्पर्धी पेशेवर वातावरण के लिए तैयार होना पड़ता है।
ग्रामीण विकास से रोजगार और उद्यमिता तक जुड़ा कार्यक्रम
डॉ. रणधीर रांटा ने कहा कि ग्रामीण विकास के विद्यार्थियों को प्रबंधन विशेषज्ञता के साथ मानवीय कौशल का भी मजबूत संयोजन चाहिए। ग्रामीण विकास मूल रूप से लोगों से जुड़ा क्षेत्र है। इस क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों के लिए समुदायों को समझना, प्रभावी संवाद करना, संवेदनशीलता रखना, टीम का नेतृत्व करना और विचारों को व्यावहारिक योजनाओं में बदलना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण से तैयार विद्यार्थी ग्रामीण उद्यमिता, सामाजिक उद्यम, कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी, सरकारी विकास योजनाओं, गैर सरकारी संगठनों, सूक्ष्म वित्त, ग्रामीण पर्यटन, टिकाऊ विकास और समुदाय आधारित उद्यमों जैसे क्षेत्रों में योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उद्यमिता और नवाचार को भी संभावित करियर विकल्प के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि एमबीए के बाद केवल नौकरी को ही करियर का एकमात्र विकल्प मानने के बजाय विद्यार्थी अपने कौशल और रुचि के अनुसार उद्यमिता तथा नवाचार की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।
भविष्य के लिए सक्षम मानव संसाधन तैयार करने पर जोर
कार्यक्रम में भारत में युवा आबादी की बड़ी हिस्सेदारी और उसे सक्षम मानव संसाधन में बदलने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। विद्यार्थियों को जीवनभर सीखने, नवाचार, परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। आयोजकों ने कहा कि देश की भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता केवल तकनीकी प्रगति पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि मानव संसाधन की गुणवत्ता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
डॉ. रणधीर रांटा ने कहा कि विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को समझने, पेशेवर कौशल विकसित करने और अपने ज्ञान को वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में इस्तेमाल करने के अधिक अवसर देने चाहिए।
विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी
विशेष सत्र में एमबीए ग्रामीण विकास के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने मुख्य वक्ता के साथ संवाद किया और व्यक्तिगत परिवर्तन, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, मानवीय क्षमता, मनोवैज्ञानिक आकलन, डिजिटल तकनीक और करियर विकास जैसे विषयों में रुचि दिखाई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. रणधीर रांटा के साथ डॉ. एवं संजू शर्मा, डॉ. बलदेव नेगी और अन्य शिक्षकों का भी सहयोग रहा। आयोजन टीम में शामिल नैन्सी, आकांक्षा, चातली और मुस्कान ने विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा कार्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने सत्र की व्यावहारिक और संवादात्मक प्रकृति की सराहना की। आयोजकों के अनुसार भविष्य में भी विद्यार्थियों के लिए करियर मार्गदर्शन, नेतृत्व विकास, उद्यमिता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और कौशल विकास से जुड़े ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
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