हिमाचल प्रदेश के किसान अब अपनी औषधीय जड़ी-बूटियां सीधे कंपनियों को बेच सकेंगे। इसके लिए आयुष विभाग ने किसानों और कंपनियों के बीच तीन पक्षीय समझौता किया है। इस व्यवस्था के तहत विभाग मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा और किसानों तथा कंपनियों के बीच समन्वय स्थापित करेगा। इससे किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बाजार तलाशने में आसानी होगी और बिक्री में होने वाली देरी से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
अब तक जड़ी-बूटियों की बिक्री में देरी होने के कारण किसानों को कई बार अपने उत्पादों के उचित दाम मिलने में परेशानी होती थी। नई व्यवस्था के तहत किसानों को सीधे कंपनियों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
किसानों और कंपनियों के बीच आयुष विभाग बनेगा कड़ी
आयुष विभाग इस व्यवस्था में किसानों और कंपनियों के बीच मध्यस्थता करेगा। विभाग की ओर से कंपनियों को सूचीबद्ध किया गया है, जिन्होंने किसानों के साथ उत्पादों की आपूर्ति के लिए समझौते किए हैं। आयुष निदेशक रोहित जमवाल ने बताया कि विभाग ने तीन पक्षीय समझौता किया है। इसके तहत विभाग मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा और किसान अपनी जड़ी-बूटियां सीधे कंपनियों को बेच सकेंगे। उन्होंने बताया कि कंपनियों को सूचीबद्ध किया गया है और उन्होंने किसानों के साथ करार भी किए हैं।