हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवा मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय में माना है कि भले ही किसी दैनिक वेतनभोगी की सेवाएं अवैध रूप से समाप्त की गई हों और औद्योगिक विवाद अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन हुआ हो। लेकिन मामला 16 वर्षों के अत्यधिक विलंब के बाद उठाया गया है, तो कर्मचारी को पुनर्नियुक्ति नहीं दी जा सकती। हालांकि, न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने याचिकाकर्ता की 9 वर्षों से अधिक की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए श्रम न्यायालय की ओर से दिए गए 75,000 के मुआवजे को नाकाफी माना और इसे बढ़ाकर 2,50,000 कर दिया है। अदालत ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बिजली बोर्ड को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को 4 सप्ताह के भीतर 2,50,000 रुपये का भुगतान करे।
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