हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपील को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन या अंक सुधार परीक्षा के बाद बढ़ा हुआ स्कोर मूल परीक्षा उत्तीर्ण करने की तिथि से ही लागू माना जाएगा। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु की खंडपीठ ने सिंगल जज के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि ईशान डोगरा को किन्नौर संभाग के किल्बा या करछम में उपलब्ध दो रिक्त पदों में से एक पर चार सप्ताह के भीतर वन मित्र के रूप में नियुक्त किया जाए। चूंकि अपीलकर्ता रामपुर का निवासी है (जो किन्नौर से सटा हुआ है), इसलिए संबंधित बीट का स्थानीय निवासी होने की शर्त में छूट प्रदान की गई है। अपीलकर्ता को बैकडेटेड वरिष्ठता का लाभ नहीं मिलेगा, उसकी सेवा से जुड़े लाभ केवल नियुक्ति आदेश की तिथि से लागू होंगे। इसके अलावा सिंगल जज द्वारा लगाया गया 5,000 रुपये का जुर्माना भी रद्द कर दिया गया है।


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