गोबिंद सागर झील का जलस्तर बढ़ते ही कहलूर रियासत की ऐतिहासिक विरासत एक बार फिर पानी में समा गई है। बरसात के बाद झील का पानी सांडू मैदान तक पहुंच गया है। इसके साथ ही झील में मौजूद कहलूर रियासत के करीब आठ ऐतिहासिक मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं। अब करीब पांच से छह माह बाद, गर्मियों में जलस्तर कम होने पर ही ये मंदिर दोबारा दिखाई देंगे। ये मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कहलूर रियासत के इतिहास, स्थापत्य और शिल्पकला के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। इन संरचनाओं में छठी से 17वीं सदी तक की शिल्प परंपरा, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और प्राचीन मंदिर निर्माण शैली की झलक मिलती है। भाखड़ा बांध के निर्माण के बाद पुराना कहलूर क्षेत्र जलमग्न हो गया था। वर्ष 1960 में गोबिंद सागर झील के अस्तित्व में आने के बाद कहलूर रियासत के दर्जनों ऐतिहासिक मंदिर पानी में समा गए थे।
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