रामपुर बुशहर, विशेषर नेगी।

हिमाचल किसान सभा के 17वें राज्य सम्मेलन के दौरान रामपुर बुशहर में किसानों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। सम्मेलन के तहत किसान सभा ने रामपुर बाजार में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। रैली को अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, राज्य महासचिव एवं पूर्व विधायक राकेश सिंघा और राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने संबोधित किया।

सभा में वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और किसानों की घटती आय को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खेती में उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वक्ताओं ने अमेरिका और न्यूजीलैंड के साथ प्रस्तावित व्यापारिक समझौतों के संभावित प्रभावों पर भी सवाल उठाए। इसके साथ ही खाद्य वस्तुओं, चीनी, रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना की।

अमेरिका के दबाव में फैसले लेने का आरोप

किसान नेता एवं पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में देश की खेती और किसानी गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में फैसले ले रही है, जिससे देश की स्वतंत्र नीतियों और किसानों के हितों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े फैसलों में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

लोकतंत्र और मताधिकार पर भी उठाए सवाल

राकेश सिंघा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चिंता जताते हुए आम नागरिक के मताधिकार के भविष्य पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है और आम जनता की आवाज को नीतिगत फैसलों में उचित स्थान मिलना चाहिए।

दूध उत्पादकों को भुगतान का मुद्दा उठाया

हिमाचल प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए सिंघा ने दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि दूध उत्पादकों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है और उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार दूध का मूल्य भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने दुग्ध उत्पादकों को पेश आ रही समस्याओं के समाधान की जरूरत पर जोर दिया।

किसान सभा के इस सम्मेलन और विरोध रैली के माध्यम से किसान नेताओं ने कृषि नीतियों, बढ़ती महंगाई, व्यापारिक समझौतों तथा दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं को लेकर सरकारों के समक्ष अपनी चिंताएं रखीं।

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