इंद्र सिंह थापा, शिमला।
Published by: Krishan Singh

Updated Fri, 18 Sep 2026 06:30 AM IST

पूरे हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास का असर अब प्राकृतिक आपदाओं के साथ जल सुरक्षा पर भी गहराता जा रहा है।  नई रिपोर्ट के अनुसार ग्लेशियरों के द्रव्यमान में कमी की रफ्तार पिछले एक दशक में 65 प्रतिशत तेज हुई है।

glacier melting Rate in the Himalayas accelerated by 65 percent; more than half of springs dried up

हिमालय में ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार 65 फीसदी तेज।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क



विस्तार

हिमाचल प्रदेश समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास का असर अब प्राकृतिक आपदाओं के साथ जल सुरक्षा पर भी गहराता जा रहा है। नई रिपोर्ट के अनुसार ग्लेशियरों के द्रव्यमान में कमी की रफ्तार पिछले एक दशक में 65 प्रतिशत तेज हुई है। भारतीय हिमालय के 30 लाख से अधिक झरनों में से करीब आधे सूख चुके हैं या मौसमी हो गए हैं। भारत में भूस्खलन संभावित क्षेत्र का करीब तीन-चौथाई हिस्सा हिमालय में है। ऐसे में हिमालय क्षेत्र में आने वाले वर्षों में पानी और आपदाओं का खतरा और गंभीर होने की आशंका है।


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