हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सरकार की ओर से लगाए गए सेस को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर सेस लगाने का उद्देश्य विधवा महिलाओं और उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध करवाना था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उन्होंने पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में पेट्रोल-डीजल की कीमतों की तुलना की तो हिमाचल के मुकाबले वहां कीमतों में करीब 100 रुपये का अंतर होने की स्थिति सामने आई थी। इसी अंतर को देखते हुए विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा के लिए सेस लगाने का विचार किया गया।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से कानून पास कर सेस लगाया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में भी हिमाचल में पेट्रोल और डीजल की कीमत उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा के मुकाबले करीब 60 से 70 पैसे कम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण वहां की स्थिति अलग है। सरकार ने पड़ोसी राज्यों के साथ कीमतों के अंतर को ध्यान में रखते हुए सेस लगाया है। इसके बावजूद हिमाचल में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पड़ोसी राज्यों से कम रखने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने इसी कीमत के अंतर को भरने के उद्देश्य से सेस लगाया है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। सरकार की ओर से सेस लगाने के पीछे सामाजिक कल्याण और विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा को प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।

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