अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Krishan Singh

Updated Wed, 26 Aug 2026 07:00 AM IST

पहाड़ की ढलानों पर छोटी-छोटी बस्तियां थीं और जंगलों के बीच से गुजरते रास्ते ही लोगों की आवाजाही का सहारा थे। बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए पानी की व्यवस्था करने वाला एक फकीर भी यहां रहता था। 30 अगस्त 1817 को शिमला पहुंचे ब्रिटिश सर्वेक्षणकर्ता जेरार्ड बंधुओं के विवरण ने उस समय की इस बस्ती की एक दुर्लभ तस्वीर सामने रखी।

A fakir, a forest, and a settlement on the mountain... this is where the story of Shimla began.

शिमला की पुरानी तस्वीर। जब यहां जंगल और पहाड़ ही थे।
– फोटो : अमर उजाला प्रिंट



विस्तार

शिमला को देखकर आज शायद ही कोई कल्पना कर पाए कि करीब दो सौ साल पहले यहां की पहचान घने जंगलों के बीच बसे एक छोटी-से पहाड़ी गांव के रूप में थी। आज जहां रिज और मालरोड पर दिनभर सैलानियों की चहल-पहल रहती है, वहीं उस समय यहां न पक्की सड़कें थीं, न बड़े भवन और न ही शहर जैसी कोई व्यवस्था। पहाड़ की ढलानों पर छोटी-छोटी बस्तियां थीं और जंगलों के बीच से गुजरते रास्ते ही लोगों की आवाजाही का सहारा थे। बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए पानी की व्यवस्था करने वाला एक फकीर भी यहां रहता था।


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