हिमाचल में बुजुर्ग सिर्फ उम्र का एक पड़ाव नहीं, बल्कि परिवार और समाज की मजबूत कड़ी हैं। गांव की चौपाल पर अखबार पढ़ते बुजुर्ग, मंदिर की ओर जाते वरिष्ठ नागरिक, खेतों में अनुभव बांटते दादा-दादी और बच्चों को लोककथाएं सुनातीं नानियां, हिमाचली समाज की एक जीवंत तस्वीर पेश करती हैं। यहां बुजुर्ग केवल एक आयु वर्ग नहीं, बल्कि अनुभव, परंपराओं और संस्कारों की जीवित विरासत हैं। प्रदेश के 92 फीसदी से अधिक वरिष्ठ नागरिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और सेवानिवृत्ति के बाद अधिकांश लोग शहरों की भागदौड़ छोड़ गांव लौटकर अपनी जड़ों से फिर जुड़ रहे हैं।
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