संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Krishan Singh

Updated Fri, 21 Aug 2026 05:15 AM IST

अदालत ने कहा कि फायर डिपार्टमेंट और प्रदूषण बोर्ड जैसी संस्थाएं जनता की सुरक्षा से जुड़ी हैं। अगर इनके जाली सर्टिफिकेट बनाने के मामलों को आपसी समझौते से निपटाया जाने लगा, तो इससे अपराधियों के हौसले बढ़ेंगे। लोग पहले फर्जीवाड़ा करेंगे और पकड़े जाने पर शिकायतकर्ता को पैसे देकर केस रफा-दफा कर लेंगे। 


Himachal High Court: Forgery of documents is a crime against society; FIR cannot be quashed.

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी या नियामक विभागों के दस्तावेजों में जालसाजी और धोखाधड़ी जैसे संगीन आपराधिक मामलों को केवल शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुए आपसी समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि फायर डिपार्टमेंट और प्रदूषण बोर्ड जैसी संस्थाएं जनता की सुरक्षा से जुड़ी हैं। अगर इनके जाली सर्टिफिकेट बनाने के मामलों को आपसी समझौते से निपटाया जाने लगा, तो इससे अपराधियों के हौसले बढ़ेंगे। लोग पहले फर्जीवाड़ा करेंगे और पकड़े जाने पर शिकायतकर्ता को पैसे देकर केस रफा-दफा कर लेंगे। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने सोलन जिला के बद्दी थाना में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी की एफआईआर रद्द करने की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।


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