भक्तों के सहयोग से 200 बैग तूड़ी और 200 बैग चोकर सहित दाना, नमक व लड्डू विभिन्न गौशालाओं को वितरित
शिमला , विशेषर नेगी।
इंसानियत केवल मनुष्यों की सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन बेजुबान जीवों के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी निभाना भी है, जो अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं। इसी भावना को साकार करते हुए शिमला स्थित सृष्टि माता मंदिर तारा देवी की ओर से किन्नौर, रामपुर बुशहर और शिमला के आसपास की विभिन्न गौशालाओं में रह रहे बेसहारा गोवंश की सहायता के लिए चारा और पशु आहार वितरित किया गया।

मंदिर के भक्तों द्वारा एकत्रित सामग्री में 200 बैग तूड़ी और 200 बैग चोकर के साथ दाना, नमक एवं लड्डू शामिल रहे। यह सहायता उन गौशालाओं तक पहुंचाई गई, जहां लावारिस और बेसहारा गोवंश को आश्रय देकर उनकी देखभाल की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य गौशालाओं में रह रहे गोवंश के भरण-पोषण में सहयोग देना और समाज में जीव सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

सेवा ही सच्ची श्रद्धा का स्वरूप
सृष्टि माता मंदिर तारा देवी के मुख्य पुजारी रमेश ठाकुर ने कहा कि मंदिर की ओर से जनकल्याण और सेवा से जुड़े कार्य समय-समय पर किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों पर बेसहारा छोड़े गए गोवंश की देखभाल समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे पशुओं को आश्रय देने वाली गौशालाएं सेवा का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं और उनके संचालन में सहयोग देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मंदिर के भक्तों के सहयोग से किया गया यह प्रयास केवल चारा वितरित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों के मन में बेजुबान जीवों के प्रति करुणा, संवेदना और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना भी है। जब समाज के लोग मिलकर ऐसे कार्यों में आगे आते हैं, तो जरूरतमंद जीवों को सहारा मिलता है और सेवा की भावना भी मजबूत होती है।
रमेश ठाकुर ने कहा कि सृष्टि माता मंदिर तारा देवी भविष्य में भी सेवा और सहायता से जुड़े कार्यों के लिए तत्पर रहेगा। उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार बेसहारा गोवंश की सहायता के लिए आगे आएं और गौशालाओं को सहयोग दें।

गौशालाओं में पल रहे बेजुबानों की सेवा जरूरी
इस दौरान मंदिर के मुख्य कारदार अमित मेहता ने कहा कि सड़कों पर छोड़े गए लावारिस गोवंश को गौशालाओं में आश्रय देकर उनकी देखभाल करना बेहद जरूरी है। इन बेजुबान जीवों को भोजन, पानी, सुरक्षित आश्रय और नियमित देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे में गौशालाओं को चारा और पशु आहार उपलब्ध करवाना एक महत्वपूर्ण सेवा है।
उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि पशुओं को बेसहारा छोड़ देना समस्या का समाधान नहीं है। गोवंश के प्रति संवेदनशीलता दिखाना और उनकी देखभाल में सहयोग करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। मंदिर के भक्तों द्वारा दिया गया सहयोग इस बात का उदाहरण है कि सामूहिक प्रयासों से सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
बेजुबानों की सेवा का संदेश, समाज के नाम एक प्रेरणा
सृष्टि माता मंदिर तारा देवी की यह पहल समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि श्रद्धा तभी सार्थक होती है, जब वह करुणा और सेवा के रूप में दिखाई दे। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ-साथ जरूरतमंद जीवों की सहायता के लिए आगे आना भी मानवीय संवेदनाओं का परिचायक है।
बेसहारा गोवंश अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। उसकी भूख, तकलीफ और जरूरतों को समझना ही सच्ची संवेदनशीलता है। ऐसे में मंदिर के भक्तों द्वारा जुटाई गई चारा सामग्री उन गौशालाओं के लिए सहारा बनने के साथ-साथ समाज को भी प्रेरित करती है कि सेवा के लिए बड़े संसाधनों से अधिक जरूरी है—एक संवेदनशील मन और मदद के लिए बढ़ते हाथ।
यह पहल याद दिलाती है कि बेजुबानों की सेवा किसी एक व्यक्ति, संस्था या मंदिर की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। यदि हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार थोड़ा-सा सहयोग करे, तो अनेक बेसहारा जीवों के जीवन में राहत लाई जा सकती है।
