हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में पर्यटन के साथ एडवेंचर स्पोर्ट्स को भी नई पहचान मिलने जा रही है। जिले में अब पर्यटक 11,482 फीट की ऊंचाई से पैराग्लाइडिंग का रोमांच महसूस कर सकेंगे। शशुर बौद्ध मठ से पैराग्लाइडिंग शुरू करने की दिशा में किया गया तकनीकी ट्रायल सफल रहा है।
बुधवार को अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान की तकनीकी टीम ने शशुर मठ से पैराग्लाइडिंग की परीक्षण उड़ान की। साइट का निरीक्षण और ट्रायल करने के बाद टीम ने इसे पैराग्लाइडिंग के लिए उपयुक्त पाया। अगर नियमित उड़ानों को मंजूरी मिलती है तो शशुर मठ लाहौल क्षेत्र का पहला आधिकारिक पैराग्लाइडिंग पॉइंट बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
11,482 फीट से दिखेगा जांस्कर का विहंगम दृश्य
शशुर मठ समुद्रतल से करीब 11,482 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से उड़ान भरने वाले पर्यटकों को आसमान से जांस्कर रेंज के साथ आसपास के बर्फीले पहाड़ों और हिमनदों का शानदार नजारा देखने का मौका मिलेगा। पैराग्लाइडिंग उड़ान के लिए बिलिंग गांव में लैंडिंग स्थल निर्धारित किया गया है। प्रस्तावित उड़ान को पूरा करने में करीब छह मिनट का समय लगने की बात सामने आई है। ऊंचाई और प्राकृतिक दृश्यों के लिहाज से यह साइट पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन सकती है।
कुल्लू-लाहौल की सबसे ऊंची पैराग्लाइडिंग साइट
शशुर की खासियत इसकी ऊंचाई भी है। इसे कुल्लू और लाहौल क्षेत्र की सबसे ऊंची पैराग्लाइडिंग साइट बताया जा रहा है। ऐसे में यहां शुरू होने वाली उड़ानें साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए नया अनुभव लेकर आ सकती हैं।
अटल टनल बनने के बाद लाहौल-स्पीति में पर्यटकों की आवाजाही में काफी बढ़ोतरी हुई है। गर्मियों के दौरान प्राकृतिक पर्यटन के साथ-साथ सर्दियों में बर्फबारी पर्यटकों को आकर्षित करती है। अब पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधि शुरू होने से जिले में एडवेंचर टूरिज्म का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है।
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