हिमाचल की पहचान केवल बर्फ से ढके पहाड़ों और खूबसूरत पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का पारंपरिक खान-पान भी प्रदेश की समृद्ध संस्कृति का अहम हिस्सा है। इसी पहाड़ी स्वाद को देश और दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में शिमला में आयोजित हिमाचल कुलिनरी एंड टूरिज्म फेस्टिवल में खास पहल देखने को मिली।

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आईएचएम शिमला (कुफरी) में हिम आंचल शेफ एसोसिएशन की ओर से आयोजित फेस्टिवल में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम में उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि हिमाचल के पारंपरिक व्यंजनों को केवल त्योहारों और विशेष आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नियमित खान-पान और व्यवसाय का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए नवाचार, गुणवत्ता और नैतिकता बेहद जरूरी हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी स्थानीय खाद्य उत्पाद को बाजार में उतारने से पहले उसके स्वाद, गुणवत्ता, प्रस्तुति, स्वच्छता, तापमान, समय प्रबंधन और उत्पादन प्रक्रिया पर पर्याप्त अभ्यास और शोध किया जाना चाहिए।

उपायुक्त ने कहा कि खाद्य कारोबार में उपभोक्ता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है। गुणवत्ता या खाद्य सुरक्षा के साथ समझौता करने से किसी भी उत्पाद की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

फेस्टिवल में प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित किए गए। इनमें कांगड़ी धाम, गुच्छी की सब्जी, पतरोड़े, सिड्डू, लाल चावल, सेपू बड़ी, बिच्छू बूटी की चाय, कोदरे की रोटी, रागी के लड्डू और चंबयाली राजमा विशेष आकर्षण रहे।

इसके अलावा विभिन्न प्रकार के केक भी प्रदर्शनी में रखे गए। विद्यार्थियों और महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजनों को नए अंदाज में प्रस्तुत किया।

उपायुक्त ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक व्यंजनों में नए प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन नवाचार के साथ इनके मूल स्वाद और पहचान को बनाए रखना भी जरूरी है।

अनुपम कश्यप ने कहा कि हिमाचल की महिलाएं आज विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। कई महिलाओं ने पारंपरिक व्यंजनों और अपने हुनर को कारोबार का रूप देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय खान-पान को पर्यटन से जोड़ने से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके लिए युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को आगे आना चाहिए।

उपायुक्त ने कहा कि किसी भी खाद्य उत्पाद को बड़े बाजार में पहुंचाने से पहले बार-बार परीक्षण और उपभोक्ताओं से फीडबैक लेना जरूरी है। फूड सेफ्टी, हाइजीन और नैतिक मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने युवा उद्यमियों से कहा कि बिना पूरी तैयारी के किसी उत्पाद को बाजार में लॉन्च नहीं करना चाहिए। बेहतर पैकेजिंग, आधुनिक उपकरणों और मजबूत आधारभूत ढांचे में निवेश के साथ हिमाचली उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।

कार्यक्रम का एक खास आकर्षण 451 विभिन्न प्रकार के सिड्डू तैयार करने वाले शेफ नंदलाल और उनकी टीम का सम्मान रहा। टीम को लिम्का अवॉर्ड के लिए भी सम्मानित किया गया है।

फेस्टिवल में विभिन्न श्रेणियों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को मेडल और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

होम शेफ श्रेणी: गोल्ड मेडल चमन लाल शर्मा, सिल्वर अंजना और ब्रॉन्ज रिया एवं रेणु को मिला।

होम बेकर श्रेणी: गोल्ड अंजना, सिल्वर आरती अग्रवाल और ब्रॉन्ज यशस्वी एवं सान्या शर्मा ने हासिल किया।

स्टूडेंट शेफ वर्ग: कक्षा 9वीं-10वीं में कार्तिक कौशल और कक्षा 11वीं-12वीं में रिया, कल्पना तथा प्रियांचल चौहान ने क्रमश: गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए।

हॉस्पिटैलिटी श्रेणी में जोगिन्द्र ने गोल्ड, स्टेजिन ने सिल्वर और रिया एवं पीयूष मंगला तथा सुमित राय, अनुज कुमार एवं गगन ठाकुर की टीम ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।

फेस्टिवल का उद्देश्य हिमाचल के पारंपरिक खान-पान को बढ़ावा देना और उसे पर्यटन उद्योग से जोड़ना रहा। हिमाचल आने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय भोजन स्वयं एक बड़ा आकर्षण बन सकता है।

ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता, स्वच्छता, प्रस्तुति और प्रामाणिकता को बनाए रखते हुए उन्हें आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए तो हिमाचली खान-पान पर्यटन के साथ-साथ रोजगार का भी मजबूत माध्यम बन सकता है।

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