हिमाचल के चार जिले देशभर के 274 संवेदनशील ड्रग प्रभावित जिलों में शामिल किए गए हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अनुसार कुल्लू, सोलन, सिरमौर और मंडी में नशे की तस्करी और खपत से जुड़े जोखिम को देखते हुए इन पर लगातार निगरानी रखने की हिदायत सरकार को दी गई है। इन जिलों की पहचान सिर्फ नशा बरामदगी के आंकड़ों से नहीं, बल्कि दर्ज मामलों, गिरफ्तारियों और  स्थानीय स्तर से मिली सूचनाओं समेत विभिन्न रिकॉर्ड के विश्लेषण के आधार पर की गई है।


एनसीबी के अनुसार सोलन की संवेदनशीलता के पीछे हरियाणा और पंजाब से इसकी भौगोलिक निकटता के साथ बद्दी का बड़ा औद्योगिक क्षेत्र भी है। सीमावर्ती राज्यों से होने वाली आवाजाही के कारण सोलन-बद्दी क्षेत्र को ड्रग नेटवर्क के संभावित ट्रांजिट रूट के तौर पर भी देखा जा रहा है। जिले में ऐसे नेटवर्क के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया गया है। सिरमौर में उत्तराखंड की सीमा और दूसरे राज्यों को जोड़ने वाले मार्गों को चुनौती माना गया है।

कालाअंब और पांवटा साहिब क्षेत्र में फार्मास्यूटिकल दवाओं के अवैध डायवर्जन की शिकायतों के साथ सिंथेटिक नशे की तस्करी पर भी निगरानी बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। कुल्लू को चरस तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माना गया है। वहीं मंडी भी एनसीबी की संवेदनशील जिलों की सूची में शामिल है। बिलासपुर और कांगड़ा को लेकर भी एहतियात बरतने का सुझाव दिया गया है। हालांकि इन्हें संवेदनशील जिलों में शामिल नहीं किया गया है।

नशे के खिलाफ पंचायतें बनें निगरानी तंत्र का हिस्सा

एनसीबी ने ड्रग प्रभावित संवेदनशील जिलों में पंचायतों को निगरानी तंत्र का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया है। एजेंसी का फोकस बड़े तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ उन स्थानीय क्षेत्रों में सूचना और निगरानी तंत्र मजबूत करने पर है, जहां नशे की तस्करी व खपत का जोखिम अधिक पाया गया है।

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