हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल लंबे समय तक कब्जे में रहने भर से कोई भी केयरटेकर या नौकर संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की अदालत ने ट्रायल कोर्ट और जिला जज कांगड़ा के फैसलों को बरकरार रखते हुए ओम प्रकाश (अब मृत, एलआर के माध्यम से) की ओर से दायर रेगुलर सेकंड अपील को खारिज कर दिया है।




अदालत ने पाया कि आरोपी ने खुद पत्र लिखकर स्वीकार किया था कि वह केवल संपत्ति की देखरेख (देखभाल) कर रहा था। हाईकोर्ट ने कहा कि वर्ष 1976 में हिमाचल प्रदेश लैंड रिकॉर्ड्स मैनुअल के नियम 9.8 और लैंड रेवेन्यू एक्ट की धारा 38 के तहत निर्धारित अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना मिलीभगत से खसरा गिरदावरी में किरायेदार का नाम चढ़ाया था जो पूरी तरह अवैध और शून्य है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने दोहराया कि केयरटेकर या एजेंट का कब्जा केवल मालिक की ओर से होता है और मांग करने पर उसे तुरंत कब्जा वापस सौंपना पड़ता है।

Source: Read original article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed